थाना प्रभारी से मुख्यमंत्री तक फरियाद, फिर भी नहीं खुला रास्ता; पीड़ित ने दी आत्मदाह की चेतावनी”
हरदोई , अचल वार्ता। थाना मल्लावां क्षेत्र के ग्राम मढ़िया जफरपुर में दबंगों द्वारा आबादी के पुराने रास्ते को दीवार खड़ी कर बंद किए जाने का मामला सामने आया है। लगातार शिकायतों के बावजूद समस्या का समाधान न होने से आहत पीड़ित राजपाल सिंह ने अब जिलाधिकारी कार्यालय पर आत्मदाह करने की चेतावनी दी है। पीड़ित का कहना है कि वह थाना प्रभारी से लेकर मुख्यमंत्री तक अपनी फरियाद पहुंचा चुका है, लेकिन रास्ता बंद करने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी।राजपाल सिंह पुत्र महादेव सिंह का आरोप है कि गांव के ही हरिनाम सिंह पुत्र शारदा बख्श सिंह तथा अनुज सिंह, हरिओम सिंह और अमन सिंह उर्फ नन्हू सिंह पुत्रगण हरिनाम सिंह पुरानी रंजिश के चलते आबादी के रास्ते में आए दिन ट्रैक्टर खड़ा कर देते थे तथा रघुवीर बढ़ई की गाय-भैंस बंधवाकर आवागमन बाधित करते थे। पीड़ित के अनुसार कई बार शिकायत करने पर पुलिस मौके पर पहुंचकर रास्ता खुलवा चुकी है। रास्ते में वर्षों पुरानी बिजली लाइन और विद्युत पोल भी मौजूद हैं।पीड़ित के अनुसार स्थानीय स्तर पर सुनवाई न होने पर उसने गोरखपुर स्थित मुख्यमंत्री आवास पहुंचकर शिकायत की। इसके बाद थाना दिवस में उपजिलाधिकारी, राजस्व विभाग और पुलिस की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बयान लिए गए। पीड़ित का कहना है कि मकान का बैनामा करने वाले सियाराम गुप्ता ने अधिकारियों के समक्ष स्पष्ट किया कि उन्होंने मकान का बैनामा किया था, रास्ते का नहीं। उन्होंने मकान के दक्षिण दिशा में पुश्तैनी पुराना रास्ता होने की बात भी कही।राजपाल सिंह का दावा है कि इसी के आधार पर बिलग्राम उपजिलाधिकारी, नायब तहसीलदार और राजस्व विभाग की टीम ने 24 जुलाई 2026 को पुलिस की मौजूदगी में रास्ते से ट्रैक्टर व जानवर हटवाकर निसार अली की दीवार के सामने से रास्ता साफ कराया था। इसके बाद कुछ समय तक आवागमन सुचारु रूप से चलता रहा।पीड़ित का आरोप है कि 11 अगस्त की रात करीब एक बजे अनुज सिंह, हरिओम सिंह, अमन सिंह उर्फ नन्हू सिंह, अर्जुन सिंह पुत्र समरपाल सिंह, सुमित सिंह पुत्र सरवन सिंह, बुधपाल सिंह समेत अन्य लोगों ने 25-30 बाहरी लोगों को बुलाकर रास्ते में तीन दीवारें खड़ी कर दीं। इससे आवागमन पूरी तरह बंद हो गया। विरोध करने पर पीड़ित और उसके पुत्र को जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप है।राजपाल सिंह के मुताबिक घटना की सूचना डायल-112 पर दी गई, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन आरोप है कि निर्माण कार्य नहीं रुकवाया गया और दीवारें खड़ी होती रहीं। इसके बाद पीड़ित थाने पहुंचा और शिकायत देना चाहा, लेकिन आरोप है कि उसकी शिकायत लेने के बजाय उसे डांट-फटकार कर यह कहते हुए वापस कर दिया गया कि मामला राजस्व विभाग से संबंधित है।लगातार अधिकारियों के चक्कर लगाने के बावजूद रास्ता बंद होने से पीड़ित परिवार परेशान है। राजपाल सिंह का कहना है कि एक ओर सरकार सार्वजनिक रास्तों को कब्जामुक्त कराने पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी ओर उसकी शिकायतों के बावजूद स्थानीय स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है।पीड़ित ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर पुराने रास्ते को तत्काल कब्जामुक्त कराने, धमकी देने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा भविष्य में रास्ता बंद किए जाने की पुनरावृत्ति रोकने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि उसे न्याय नहीं मिला और रास्ता नहीं खुलवाया गया तो वह जिलाधिकारी कार्यालय पर आत्मदाह करने को मजबूर होगा। प्रशासन के सामने अब चुनौती यह है कि मामले में समय रहते प्रभावी कार्रवाई कर किसी अप्रिय घटना को रोका जाए।
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