दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए मनोसामाजिक सहयोग पर कार्यशाला आयोजित
लखनऊ, अचल वार्ता। मनोसामाजिक सहयोग प्रणाली, अभिभावकों और शिक्षकों की भूमिका विषय पर स्पर्श राजकीय दृष्टिबाधित बालक विद्यालय में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय के दृष्टिबाधिता विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यशाला का शुभारंभ दृष्टिबाधिता विभाग की छात्राओं द्वारा सरस्वती वंदना से हुआ। विभागाध्यक्ष डॉ. आद्या शक्ति राय ने कहा कि दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए मनोसामाजिक सहयोग अत्यंत आवश्यक है तथा अभिभावकों और शिक्षकों की संयुक्त भूमिका ही उन्हें आत्मनिर्भर एवं आत्मविश्वासी बना सकती है। कार्यक्रम की मुख्य वक्ता अमिता दुबे ने कहा कि अभिभावकों का सकारात्मक दृष्टिकोण ही दृष्टिबाधित बच्चों के भविष्य को दिशा देता है। उन्होंने बताया कि उचित सहयोग और प्रोत्साहन से दृष्टिबाधित विद्यार्थी समाज में प्रेरणादायक उदाहरण बन सकते हैं।मुख्य अतिथि प्रो. वीके सिंह ने कहा कि परिवार और विद्यालय के बीच बेहतर समन्वय से ही विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास संभव है। विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. ओमकार नाथ शुक्ला ने इस प्रकार के आयोजनों को विद्यार्थियों के विकास के लिए उपयोगी बताते हुए इसकी सराहना की। कार्यक्रम में डॉ. दिनेश कुमार एवं डॉ. सुधा राव सहित अन्य विशेषज्ञों ने भी अपने विचार साझा किए। लगभग 55 अभिभावकों एवं शिक्षकों ने सहभागिता करते हुए विषय से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम के अंत में डॉ. आशीष कुमार गुप्ता द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया।
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