लखनऊ में शीतगृहों की सुदृढ़ता पर कार्यशाला, सुरक्षित भंडारण पर जोर

Apr 11, 2026 - 11:14
Apr 11, 2026 - 18:47
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लखनऊ में शीतगृहों की सुदृढ़ता पर कार्यशाला, सुरक्षित भंडारण पर जोर
  • मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने दिए वैज्ञानिक संचालन और सुरक्षा के निर्देश
  • किसानों की उपज की सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता
  • प्रदेश में 202.99 लाख मीट्रिक टन भंडारण क्षमता, 84.79 प्रतिशत उपयोग
  • प्रशिक्षण, निरीक्षण और समन्वय से मजबूत होगी कोल्ड स्टोरेज व्यवस्था

लखनऊ, अचल वार्ता। प्रदेश के उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने मुख्य अतिथि के रूप में उद्यान निदेशालय, लखनऊ में शीतगृहों की सुदृढ़ता एवं संचालन विषयक एक दिवसीय कार्यशाला  में प्रतिभाग किया। कार्यशाला में शीतगृहों में आलू भंडारण, भंडारण उपरांत प्रबंधन, मशीनरी सुदृढ़ीकरण और आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर विस्तार से चर्चा हुई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उद्यान मंत्री ने कहा कि प्रदेश में शीतगृहों का सुरक्षित एवं वैज्ञानिक संचालन अत्यंत आवश्यक है, जिससे किसानों की उपज सुरक्षित रह सके और किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचाव हो। उन्होंने अधिकारियों और संचालकों को निर्देश दिया कि भंडारण व्यवस्था में सभी मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए तथा नियमित निरीक्षण और प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएं।
मंत्री सिंह ने कहा कि पूर्व में हुई घटनाओं से सबक लेते हुए शीतगृहों में गैस प्रबंधन, वेंटिलेशन सिस्टम और मशीनरी की नियमित जांच अनिवार्य की जाए। उन्होंने सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया, ताकि भंडारण व्यवस्था अधिक सुरक्षित और प्रभावी बन सके।
कार्यशाला में यह जानकारी दी गई कि उत्तर प्रदेश आलू उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य है, जहां देश के कुल उत्पादन का लगभग 30 प्रतिशत से अधिक आलू उत्पादित होता है। प्रदेश में वर्तमान में 2363 से अधिक निजी शीतगृह संचालित हैं, जिनकी कुल भंडारण क्षमता लगभग 202.99 लाख मीट्रिक टन है। वर्तमान सत्र में लगभग 172.12 लाख मीट्रिक टन आलू भंडारित किया जा चुका है, जो कुल क्षमता का 84.79 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की तुलना में भंडारण क्षमता और उपयोग में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
कार्यशाला के दौरान शीतगृहों के आधुनिकीकरण, सौर-ऊर्जीकरण और ऊर्जा दक्षता पर विशेष चर्चा की गई। संचालकों को सरकार द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे अनुदान और तकनीकी सहयोग के बारे में भी जानकारी दी गई।
मंत्री सिंह ने उद्यान विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि शीतगृह संचालकों और कर्मचारियों के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं तथा लाइसेंसिंग और संचालन मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि विभाग और संचालकों के संयुक्त प्रयासों से ही प्रदेश में सुरक्षित और प्रभावी भंडारण व्यवस्था स्थापित की जा सकती है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होगी।
कार्यशाला में अपर मुख्य सचिव बी. एल. मीणा, निदेशक उद्यान बी. पी. राम, संयुक्त निदेशक सहित विभिन्न तकनीकी विशेषज्ञों, कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन के प्रतिनिधियों, वैज्ञानिकों एवं विभागीय अधिकारियों ने भाग लिया।

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