ट्रंप नया संयुक्त राष्ट्र बनाना चाहते हैं, ब्राजील के राष्ट्रपति लूला का आरोप
ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने डोनाल्ड ट्रंप पर नया संयुक्त राष्ट्र बनाने और बहुपक्षवाद को कमजोर करने का आरोप लगाया।
ब्राजीलिया, अचल वार्ता। ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति को लेकर एक तीखा बयान देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर गंभीर आरोप लगाए हैं। लूला ने कहा कि ट्रंप एक ऐसा “नया संयुक्त राष्ट्र” बनाना चाहते हैं, जिस पर उनका पूर्ण नियंत्रण हो और जो बहुपक्षीय व्यवस्था के बजाय एकतरफावाद को बढ़ावा दे।
ब्राजील के बाहिया प्रांत में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति लूला ने कहा कि दुनिया इस समय अत्यंत नाजुक राजनीतिक दौर से गुजर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि वर्तमान वैश्विक व्यवस्था धीरे-धीरे बहुपक्षवाद को छोड़कर ताकतवर देशों की मनमानी की ओर बढ़ रही है, जिससे संयुक्त राष्ट्र के चार्टर और उसके मूल सिद्धांत कमजोर हो रहे हैं।
बहुपक्षीय व्यवस्था को बचाने की कोशिश में लूला
लूला ने अपने संबोधन में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने पर जोर देते हुए बताया कि वे बीते कुछ हफ्तों से रूस, चीन, भारत, हंगरी और मैक्सिको समेत कई देशों के नेताओं के साथ लगातार संपर्क में हैं।
उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य एक वैश्विक बैठक आयोजित करना है, जहाँ सभी देश मिलकर बहुपक्षीय व्यवस्था के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहरा सकें।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए यह जरूरी है कि किसी एक देश की सैन्य शक्ति, हथियार या असहिष्णु सोच पूरी दुनिया पर हावी न हो। लूला ने ऐसी वैश्विक व्यवस्था की वकालत की, जहाँ सभी देशों की संप्रभुता का सम्मान हो और निर्णय सामूहिक चर्चा से लिए जाएं।
सोशल मीडिया कूटनीति पर ट्रंप पर कटाक्ष
राष्ट्रपति लूला ने इससे पहले भी अमेरिकी राष्ट्रपति की संचार शैली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने रियो ग्रांडे में एक समारोह के दौरान कहा था कि क्या ट्विटर जैसे डिजिटल मंचों के जरिए दुनिया पर शासन किया जा सकता है?
लूला के अनुसार, वास्तविक कूटनीति तब होती है जब नेता आमने-सामने बैठकर संवाद करते हैं, न कि सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए आदेश जारी करते हैं।
मोबाइल संस्कृति पर भी जताई चिंता
अपने संबोधन में लूला ने समाज में मानवीय मूल्यों के पुनर्जीवन की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने लोगों से मोबाइल फोन के अत्यधिक उपयोग से बचने की अपील की और प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा में मोबाइल उपयोग पर प्रतिबंध की अपनी नीति का समर्थन किया। उनका कहना था कि समाज को तकनीक से अधिक मानवीय संबंधों, संवाद और आपसी सम्मान पर ध्यान देना चाहिए।
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