जिला अस्पताल में प्रसव के बाद मिठाई मांगने अद्भुत खेल! प्रसव के बाद परिजनों से पैसे मांगने का आरोप, शिकायत पहुंची सीएमओ से लेकर मुख्यमंत्री तक!
अम्बेडकरनगर में सरकारी अस्पताल की ‘कागजी दौड़’ पर सवाल—पैसा दो तो काम आसान, नहीं तो फाइल में कमी तलाशने का आरोप
अम्बेडकरनगर। सरकारी अस्पताल में मरीज का इलाज मुफ्त हो या न हो, लेकिन शिकायत सामने आई है कि यहां कुछ कामों के साथ कथित तौर पर ‘मिठाई का खर्चा’ भी जुड़ जरूरी है! जिला अस्पताल अम्बेडकरनगर में प्रसव के बाद मरीज के परिजनों से कथित तौर पर पैसे मांगने और पैसा न देने पर परेशान करने का आरोप लगाते हुए शिकायतकर्ता ने स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों को लिखित शिकायत भेजी है। शिकायत के मुताबिक, 16 सितंबर 2026 को उनकी बहन के प्रसव के बाद बच्चे के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराने के लिए उन्हें अस्पताल के एक कमरे में बुलाया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि हस्ताक्षर और संबंधित प्रक्रिया के दौरान उनसे तथा उनके बहनोई से पैसे मांगे गए। मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बच्चे को टीका/इंजेक्शन लगवाने ले जाने के दौरान दो महिला कर्मचारियों ने कथित तौर पर ‘मिठाई के लिए कुछ खर्चा’ देने की बात कहते हुए पैसे मांगे। यानी अस्पताल में टीका बच्चे को और ‘मिठाई’ की उम्मीद जेब से—ऐसा आरोप शिकायत में लगाया गया है। इसके बाद वार्ड में शिफ्ट करने और डिस्चार्ज के समय भी कथित तौर पर कागजी कार्रवाई में बार-बार कमियां बताकर परिजनों को इधर-उधर दौड़ाने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि पैसा देने वालों का डिस्चार्ज संबंधी काम आसानी से और पैसा न देने वालों की फाइल में बार-बार ‘कमी’ निकलने की स्थिति सामने आई।
शिकायत में उठाया बड़ा सवाल—‘साहबों को खबर है या फाइल ही सो रही है?’
शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि जिला मुख्यालय के प्रमुख सरकारी अस्पताल में यदि मरीजों और उनके परिजनों से इस तरह पैसे मांगने की बात सामने आ रही है, तो मुख्य चिकित्सा अधिकारी और अस्पताल के वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जानकारी है या नहीं? और यदि जानकारी है तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?शिकायत में पूरे मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच, मरीज की फाइल, डिस्चार्ज रिकॉर्ड, संबंधित दस्तावेज और उपलब्ध अन्य साक्ष्यों की जांच कराने की मांग की गई है। साथ ही कथित अवैध वसूली पर रोक लगाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की प्रभावी व्यवस्था की मांग की गई है।
सीएमओ से डीएम तक, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को भी भेजी प्रतिलिपि
शिकायत की प्रतिलिपि मुख्य चिकित्सा अधिकारी अम्बेडकरनगर, जिलाधिकारी अम्बेडकरनगर, मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश तथा प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजे जाने का उल्लेख पत्र में है। शिकायतकर्ता ने बताया सभी के ईमेल पर भेज दिया गया है। अब देखना यह है कि शिकायत के बाद जांच की गाड़ी ‘मिठाई’ से आगे बढ़कर दस्तावेजों और रिकॉर्ड तक पहुंचती है या फिर मामला भी सरकारी फाइलों की तरह ‘प्रक्रियाधीन’ होकर बैठ जाता है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0