बिल में बीस टन मछली चारा मिल में चार टन कागजों के दम पर उड़ती हुई अंबेडकरनगर की मछली चारा मिल

Oct 10, 2026 - 20:43
Oct 10, 2026 - 20:48
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बिल में बीस टन मछली चारा मिल में चार टन कागजों के दम पर उड़ती हुई अंबेडकरनगर की मछली चारा मिल
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अम्बेडकरनगर अचल  वार्ता / में सरकारी योजना के तहत लगी एक मत्स्य आहार मिल इन दिनों अनोखी चर्चा में है शिकायतकर्ता का कहना है कि मौके पर केवल चार टन प्रतिदिन क्षमता वाली मशीन खड़ी है जबकि अनुदान पूरे बीस टन प्रतिदिन क्षमता की मशीन के नाम पर डकारा गया है उधर जांच अधिकारियों ने मशीन चलाकर देखने के बजाय बिल का पन्ना पलटा और सीना ठोककर कह दिया कि मशीन पूरे बीस टन की ही है अब जनता पूछ रही है कि मशीन की ताकत इंजन चालू करके नापी जाएगी या व्यापारी के बिल पर लिखे अक्षरों से मामला जहांगीरगंज के जय निषादराज इंडस्ट्रीज से जुड़ा है जहां आईजीआरएस शिकायत में पैंसठ लाख बावन हजार रुपये वाली बीस टन की मिल के नाम पर मिले सरकारी अनुदान पर सवाल खड़े किए गए हैं शिकायतकर्ता का दावा है कि मौके पर केवल इकतीस लाख बानावे हजार रुपये की चार टन क्षमता वाली मशीन लगाकर बड़ा खेल किया गया है यानी बात सिर्फ छोटी या बड़ी मशीन की नहीं बल्कि लाखों रुपये के गोलमाल और कागजी बाजीगरी की है । बस्ती मंडल के उपनिदेशक मत्स्य की जांच रिपोर्ट ने तो कमाल ही कर दिया पच्चीस सितंबर दो हजार छब्बीस की इस रिपोर्ट में फरमान जारी हुआ कि बिल पर बीस टन लिखा है इसलिए शिकायत पूरी तरह भ्रामक है अधिकारी जी ने यह सोचना भी जरूरी नहीं समझा कि बिल तो खरीद का एक पन्ना भर है असली सवाल तो यह है कि क्या मशीन में वाकई बीस टन दाना बनाने का दम है या वह चार टन में ही हांफने लगती है‌ मजेदार बात यह है कि इस चमत्कारी जांच में न तो मौके का कोई फोटो लगाया गया और न ही शिकायतकर्ता को बुलाकर उसका पक्ष सुना गया अधिकारी आए कागज देखे और फाइल बंद कर दी उधर मत्स्य निरीक्षक खुर्शीद खान का बयान तो और भी दिलचस्प है उनका कहना है कि कंपनी की तरफ से अभी तक कोई जवाब ही नहीं मिला है अब जब कंपनी ने जवाब ही नहीं दिया तो अधिकारियों ने किस जादुई चिराग से बिलों का मिलान कर लिया और जांच रिपोर्ट भी थमा दी यह अपने आप में बड़ा रहस्य है।अट्ठाईस सितंबर दो हजार छब्बीस को निदेशालय से पत्र जारी कर मामला रफा दफा करने का अनुरोध भी कर दिया गया लेकिन बीस टन बनाम चार टन की इस कुश्ती में असली सवाल अब भी अपनी जगह डटा हुआ है। सरकारी योजनाओं का सच बिल के पन्नों में छिपा है या मशीन के कलपुर्जों में यह तो कोई निष्पक्ष तकनीकी जांच ही बता सकती है फिलहाल अम्बेडकरनगर में मछली चार बने न बने सवालों की मिल दिन रात धकाधक रही है।

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