मिडिल ईस्ट में युद्ध का असर: दुबई और अबू धाबी में दहशत, प्राइवेट जेट की मांग रिकॉर्ड स्तर पर

दुबई और अबू धाबी में युद्ध के साए के बीच प्राइवेट जेट की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची। लोग 3.5 लाख डॉलर खर्च कर सुरक्षित निकास की कोशिश कर रहे हैं। जानें मिडिल ईस्ट संकट की पूरी रिपोर्ट

Mar 3, 2026 - 17:47
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मिडिल ईस्ट में युद्ध का असर: दुबई और अबू धाबी में दहशत, प्राइवेट जेट की मांग रिकॉर्ड स्तर पर

दुबई। दुनिया के सबसे सुरक्षित और लग्जरी शहरों में गिने जाने वाले दुबई और अबू धाबी अब युद्ध के साए में हैं। क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव और मिसाइल हमलों की खबरों के बीच अमीरों और विदेशी नागरिकों में भारी घबराहट देखी जा रही है। हालात ऐसे हैं कि इन शहरों से बाहर निकलने के लिए प्राइवेट जेट्स की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है।

चार्टर कंपनियों और एविएशन विशेषज्ञों के मुताबिक, खाड़ी देशों से सुरक्षित निकास के लिए लोग एक उड़ान पर 3.5 लाख डॉलर (करीब 3.2 करोड़ रुपये) तक खर्च करने को तैयार हैं।

एयरपोर्ट पर अफरा-तफरी, रियाद बना सुरक्षित निकास

हमलों और सुरक्षा अलर्ट के चलते दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट और अबू धाबी के प्रमुख हवाई अड्डों पर हजारों यात्री फंसे हुए हैं। कई नियमित उड़ानें रद्द या स्थगित कर दी गई हैं।

ऐसे में सऊदी अरब की राजधानी में स्थित किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट सुरक्षित निकास का मुख्य केंद्र बनकर उभरा है। लोग दुबई और अबू धाबी से लगभग 10 घंटे की लंबी ड्राइव कर कारों के काफिलों में सऊदी अरब पहुंच रहे हैं, जहां से वे यूरोप और अमेरिका के लिए उड़ान भर रहे हैं।

निजी सुरक्षा कंपनियां बख्तरबंद एसयूवी के जरिए नागरिकों को सुरक्षित सीमा पार कराने में जुटी हैं।

मिसाइल हमलों से हिली सुरक्षित शहरों की छवि

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष ने पूरे मिडिल ईस्ट को अस्थिर कर दिया है। ईरान द्वारा संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब के अहम ठिकानों को निशाना बनाने से हालात और गंभीर हो गए हैं।

यूएई के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, अब तक सैकड़ों मिसाइलें और ड्रोन दागे गए हैं। हालांकि अधिकांश को एयर डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही मार गिराया, लेकिन कुछ हमलों से महत्वपूर्ण ठिकानों को नुकसान पहुंचा है, जिनमें—

  • जेबेल अली पोर्ट
  • बुर्ज अल अरब
  • दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट

जैसे प्रमुख स्थान शामिल बताए जा रहे हैं। आग और अफरा-तफरी की तस्वीरों ने निवेशकों और पर्यटकों के मन में डर पैदा कर दिया है।

सऊदी अरब की भूमिका और बढ़ता खतरा

दिलचस्प रूप से रियाद अब तक बड़े हमलों से बचा हुआ है। माना जा रहा है कि सऊदी नेतृत्व ने अपनी जमीन का उपयोग ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए न होने देने का आश्वासन दिया है।

हालांकि हाल ही में सऊदी अरामको के तेल संयंत्र पर हुए हमले ने खतरे की घंटी जरूर बजा दी है। इससे वैश्विक तेल बाजार और क्षेत्रीय सुरक्षा दोनों पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

निवेश और अर्थव्यवस्था पर गहरा असर

दुबई और अबू धाबी लंबे समय से मिडिल ईस्ट के वित्तीय और पर्यटन हब रहे हैं। मौजूदा हालात ने उनकी “सुरक्षित निवेश केंद्र” वाली छवि को झटका दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव लंबा खिंचता है तो—

  • विदेशी निवेश प्रभावित हो सकता है
  • रियल एस्टेट बाजार में गिरावट आ सकती है
  • पर्यटन उद्योग को बड़ा नुकसान झेलना पड़ सकता है

मिडिल ईस्ट इस समय एक संवेदनशील मोड़ पर खड़ा है, जहां सुरक्षा और अर्थव्यवस्था दोनों दांव पर लगी हैं। दुबई और अबू धाबी जैसे शहरों से हो रही बड़े पैमाने पर निकासी क्षेत्रीय अस्थिरता की गंभीरता को दर्शाती है। आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाएंगे, इस पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है।

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