यूपीआई पर MDR लागू हुआ तो बदल सकती है भुगतान की आदत

Aug 5, 2026 - 07:53
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यूपीआई पर MDR लागू हुआ तो बदल सकती है भुगतान की आदत
यूपीई

नई दिल्ली । केंद्र सरकार भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में प्रस्तावित संशोधनों को मंजूरी देती है, तो 3,000 रुपये से अधिक के लेन-देन के लिए आधे से अधिक यूपीआई यूजर्स दूसरे विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं। इन संशोधनों से यूपीआई लेन-देन पर फिर से 'मर्चेंट डिस्काउंट रेट' (MDR) लागू हो सकता है। 

संशोधन से सरकार को धारा 10A के तहत मौजूदा 'जीरो MDR' प्रावधान को हटाकर यूपीआई पर MDR लागू करने का अधिकार मिल जाएगा। यह प्रावधान वर्तमान में बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को अधिसूचित डिजिटल पेमेंट पर शुल्क लेने से रोकता है।

बोझ व्यापारियों पर पड़ेगा

गौरतलब है कि यह विधेयक यूपीआई का उपयोग करने वाले ग्राहकों पर कोई शुल्क नहीं लगाने का प्रस्ताव रखता है, यानी यह बोझ व्यापारियों पर पड़ेगा। ग्राहकों के लिए इसका मतलब है कि MDR के कारण उन पर कोई अतिरिक्त शुल्क या लेन-देन शुल्क नहीं लगना चाहिए। 53% यूजर्स MDR लागू होने पर 3,000 रुपये से ऊपर के लेन-देन के लिए यूपीआई से बच सकते हैं।

सर्वे की खास बातें

मंगलवार को जारी लोकलसर्किल्स के सर्वे में यह पाया गया कि 53% लोगों ने कहा कि अगर बड़े व्यापारियों पर MDR लागू किया जाता है तो वे 3,000 रुपये से अधिक के लेन-देन के लिए यूपीआई का उपयोग करना छोड़ देंगे। इनमें से 27% ने कहा कि वे क्रेडिट कार्ड, 14% ने डेबिट कार्ड और 12% ने बैंक ट्रांसफर या कैश ट्रांसफर का विकल्प चुनेंगे। सर्वे में देश भर के 322 जिलों से 45,000 से अधिक प्रतिक्रियाएं मिलीं।

सर्वे के मुताबिक 18% ने कहा कि वे यूपीआई का उपयोग तभी जारी रखेंगे जब शुल्क व्यापारी वहन करे। 12% ने कहा कि वे चाहे उन्हें शुल्क देना पड़े, फिर भी यूपीआई का उपयोग जारी रखेंगे। 14% ने कहा कि उनका निर्णय शुल्क की राशि पर निर्भर करेगा।

यह सर्वे सरकार द्वारा भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम की धारा 10A में संशोधन के प्रस्ताव के बाद आया है। 2020 से, यूपीआई और RuPay डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन के लिए यह शुल्क 0% है, क्योंकि सरकार ने डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए ग्राहकों और व्यापारियों दोनों के लिए MDR न लगाने का निर्देश दिया था।

उदाहरण से ऐसे समझें

जब कोई ग्राहक क्रेडिट या डेबिट कार्ड से 1,000 रुपये का भुगतान करता है, तो उसमें से एक छोटा प्रतिशत काट लिया जाता है और दोनों बैंकों के बीच बांट दिया जाता है, जबकि व्यापारी को शुद्ध राशि मिलती है। यूपीआई लेन-देन में वर्तमान में व्यापारियों को पूरी राशि मिलती है।

Paramotor Digital Technology Limited की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया आशेर ने कहा कि ये संशोधन भारत के डिजिटल पेमेंट ईको सिस्टम के लिए अधिक टिकाऊ बिजनेस स्ट्रक्चर बनाने में मदद कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि शून्य MDR ने यूपीआई को अपनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन इतनी बड़ी मात्रा में लेन-देन के लिए विश्व स्तरीय भुगतान बुनियादी ढांचे को बनाए रखने के लिए इनोवेशन, सिक्योरिटी, फ्लेक्सिबिलिटी और ग्राहक अनुभव में निरंतर निवेश की आवश्यकता होती है।

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