भातखंडे संगीत महाविद्यालय की हीरक जयंती: तीन दिवसीय भव्य संगीतमय उत्सव का सफल आयोजन
- लखीराम ऑडिटोरियम मे देश–विदेश के कलाकारों ने बांधा समा
बिलासपुर,छत्तीसगढ़। भातखंडे संगीत महाविद्यालय की 75वीं हीरक जयंती के अवसर पर लखीराम ऑडिटोरियम में तीन दिवसीय भव्य संगीतमय उत्सव का आयोजन किया गया। इस अवसर पर देशभर से आए कलाकारों ने शास्त्रीय संगीत की अनूठी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
पहला दिन — : भव्य उद्घाटन और मनमोहक प्रस्तुतियाँ
समारोह का उद्घाटन इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. (डॉ.) लवली शर्मा ने किया। साथ में अटल श्रीवास्तव (विधायक, कोटा) एवं सुशील पटेरिया बेडारे (अध्यक्ष) उपस्थित रहे। इस दिन के संगीतानुष्ठान में अथर्व भालेराव (नागपुर) एवं अनिल देशपांडे ने गायन व तबला वादन प्रस्तुत किया। साथ ही स्थानीय कलाकार राजेश मोडेकर (तबला) व निलय साठवी (हारमोनियम) ने संगत दी।
दूसरा दिन — : उत्कृष्ट गायन से मंत्रमुग्ध हुए श्रोता
द्वितीय दिवस में मुख्य अतिथि के रूप में अमर अग्रवाल (विधायक, बिलासपुर), व्ही. के. सारस्वत (कुलपति, सुंदरलाल मुक्त विश्वविद्यालय) तथा पूजा विधानी (महापौर, नगर निगम बिलासपुर) उपस्थित रहे।
इस दिन अत्री कोटल ने अपने अद्भुत एवं सधे हुए गायन से सभी श्रोताओं का मन जीत लिया। संगत में निलय साळवी (हारमोनियम) तथा मुंबई से पधारे देवेंद्र श्रीवास (तबला) शामिल रहे।
तीसरा दिन — : समापन समारोह में शास्त्रीय संगीत की सुरमयी छटा
अंतिम दिवस के मुख्य अतिथि थे —
प्रो. ए. डी. एन. वाजपेयी (कुलपति, बिलासपुर विश्वविद्यालय) डॉ. प्रदीप कुमार (कुलपति, सी. व्ही. रामन विश्वविद्यालय) तथा सुप्रसिद्ध गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. देवेंद्र सिंह।
मुंबई में निवासरत बिलासपुर के युवा कलाकार यशवंत वैष्णव ने अपने तबला वादन से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके साथ ही मुंबई से आए आदित्य मोडक ने शास्त्रीय गायन की मनभावन प्रस्तुति दी।
संगठन व उपस्थिति
तीनों दिन कार्यक्रम में स्पिक मैके के राज्य कोऑर्डिनेटर अजय श्रीवास्तव, सचिव विप्लव चक्रवर्ती, महाविद्यालय के शिक्षक–विद्यार्थी तथा बड़ी संख्या में संगीतप्रेमी नागरिक उपस्थित रहे।
75 वर्ष पहले रखी गई थी नींव
भातखंडे संगीत महाविद्यालय की स्थापना इन्दु चक्रवर्ती एवं स्व. सुधांशु शेखर चक्रवर्ती द्वारा वसंत पंचमी–1950 को की गई थी।
प्रारंभिक परीक्षाएँ लखनऊ संगीत विद्यापीठ से संचालित होती थीं।
सन् 1955–56 में महाविद्यालय को इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ से मान्यता मिली, और तब से आज तक स्नातक, स्नातकोत्तर एवं डिप्लोमा की परीक्षाएँ इसी विश्वविद्यालय से सम्पन्न हो रही हैं।
अब तक लगभग 5000 विद्यार्थी इस महाविद्यालय से लाभान्वित हो चुके हैं।
कई पूर्व छात्र आज विभिन्न प्रतिष्ठित क्षेत्रों में अपना नाम रोशन कर रहे हैं
अर्णव चटर्जी – छत्तीसगढ़ी फिल्मों में संगीत निर्देशन
श्री गणेश – फिल्म निर्देशन एवं संगीत संयोजन
आदित्य चक्रवर्ती – बॉलीवुड फिल्मों (जैसे बोल बच्चन) में संगीत योगदान
महाविद्यालय की प्रमुख गतिविधियाँ व उपलब्धियाँ...
गुरु पूर्णिमा, विष्णु दवे पुण्यतिथि, वसंत पंचमी एवं विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों का आयोजन
सन् 2000 में राज्य में पहली बार सारेगमपा प्रतियोगिता का आयोजन
240 अनुभवी प्राध्यापकों की सतत सेवाएँ
सन् 2000 में स्वर्ण जयंती समारोह
भरथरी लोक विधा पर पहली राष्ट्रीय संगोष्ठी
2009 में हरेली व होली पर नाट्य मंचन
2009 में पाश्चात्य नृत्यशैली पर वृहद वर्कशॉप
महाविद्यालय की प्राविण्य सूची में स्थान प्राप्त विद्यार्थी
राहुल बरेठ, अमोल अरविंद फड़के, रत्नेश कुमार सूर्यवंशी, सुमित गुप्ता, दीप्ती कर्णेवार, आरती झा, कु. ऋजुता जीवन गोरे, कु. हर्षिता, कु. श्वेता दांडेकर, अभिषेक कन्नौजिया, एम.एन. विग्नेश कुमार, कु. श्रेया द्विवेदी, प्रियंका तिवारी।
- सुनील चिंचोलकर
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