लखीमपुर खीरी : डीएम ने संभाली क्लास, बोले- रटने से नहीं, समझने से खुलेगा सफलता का रास्ता
लखीमपुर खीरी, अचल वार्ता। सनातन धर्म सरस्वती बालिका विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में शुक्रवार को छात्राओं के लिए पढ़ाई का अंदाज कुछ अलग रहा। कक्षा में शिक्षक की भूमिका में नजर आए डीएम अंजनी कुमार सिंह। उन्होंने डिजिटल बोर्ड पर न्यूटन के सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियम को समझाया और सवाल-जवाब के जरिए छात्राओं की समझ परखी। डीएम ने कहा कि रटने की आदत छोड़कर विषय को समझने और उसे दिमाग में विजुअलाइज करने की आदत डालें।
डीएम ने कहा कि जो समझ में नहीं आता, उसे रट लेना आसान है, लेकिन यही आदत आगे चलकर विषय को कठिन बना देती है। जेईई-नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में केवल याददाश्त नहीं, बल्कि कॉन्सेप्ट की गहरी समझ जरूरी है। इंटरनेट और डिजिटल माध्यमों से जानकारी आसानी से मिल सकती है, लेकिन सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि विद्यार्थी उस जानकारी को कितना समझता और उसका प्रयोग कर पाता है।
साइकिल के पहिए ने उलझाया सवाल
भौतिक विज्ञान को रोचक बनाने के लिए डीएम ने छात्राओं से पूछा, “जब हम साइकिल चलाते हैं तो पहिए पर घर्षण बल किस दिशा में लगता है और क्यों?” छात्राओं ने अपने-अपने जवाब दिए। डीएम ने पूछा कि क्या सभी की राय एक जैसी है। इसके बाद उन्होंने शिक्षकों से भी अपना मत रखने को कहा। डीएम ने कहा कि ऐसे सवालों का उद्देश्य केवल सही उत्तर जानना नहीं, बल्कि उत्तर के पीछे छिपे तर्क को समझना है। उन्होंने छात्राओं को हर विषय को रटने के बजाय उसके पीछे का 'क्यों' तलाशने की सीख दी।
ज्ञान को भी करते रहें 'रिफ्रेश'
डीएम ने शिक्षकों से कहा कि कक्षा में जाने से पहले शिक्षक को खुद पढ़कर तैयारी करके आना चाहिए। यह कभी नहीं सोचना चाहिए कि यह विषय तो मुझे आता ही है। उन्होंने कहा कि वर्षों से पढ़ाई जा रही किताब को दोबारा पढ़ने पर भी नई बात और नई अंतर्दृष्टि मिल सकती है। उन्होंने कहा कि ज्ञान पर भी धूल जमती है, इसलिए उसे लगातार पढ़कर, रिवाइज और अपडेट करते रहना जरूरी है। कोई भी व्यक्ति पूर्ण नहीं होता, इसलिए सीखने की प्रक्रिया कभी खत्म नहीं होनी चाहिए।
लक्ष्य के साथ कॉन्सेप्ट भी मजबूत करें
संवाद के दौरान छात्राओं ने डॉक्टर और इंजीनियर बनने के लक्ष्य बताए। डीएम ने कहा कि लक्ष्य तय करना पहला कदम है, लेकिन उसे हासिल करने के लिए मजबूत कॉन्सेप्ट, निरंतर अभ्यास और सीखने की ललक जरूरी है। उन्होंने छात्राओं से कहा कि गलती से न घबराएं और सवाल पूछने में संकोच न करें। सवाल पूछना समझ की पहली सीढ़ी है। रटकर अंक मिल सकते हैं, लेकिन समझकर ही ज्ञान हासिल होता है।
इनकी रही मौजूदगी : इस दौरान कक्षा 12 की छात्राएं, विद्यालय की प्रधानाचार्य शिप्रा बाजपेई, प्रबंधक चंद्रभूषण साहनी, कोषाध्यक्ष तुषार गर्ग, सनातन धर्म सभा के सदस्य रवि भूषण साहनी, शिक्षाविद नीरज सिंह, भौतिक विज्ञान की शिक्षिका आराधना मिश्रा मौजूद रहे।
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