नागपंचमी पर विशेष संयोग, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त

Aug 17, 2026 - 08:13
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नागपंचमी पर विशेष संयोग, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त
प्रतीकात्मक फोटो

नागपंचमी हिन्दू धर्म का एक विशेष और आस्था से जुड़ा पर्व है, जो श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। यह दिन नाग देवता की आराधना और उनसे कृपा प्राप्त करने का अवसर होता है। मान्यता है कि इस दिन नागों की पूजा करने से कालसर्प दोष, सर्प भय और सर्पदंश जैसी बाधाओं से मुक्ति मिलती है। इस दिन भक्तगण नाग देवता को दूध अर्पित करते हैं, उन्हें स्नान कराकर पूजा-अर्चना करते हैं और सुरक्षा व समृद्धि की कामना करते हैं।

सावन के तीसरे सोमवार के साथ इस बार नागपंचमी का पर्व विशेष संयोग लेकर आ रहा है। ज्योतिषाचार्य डॉ. पूनम वार्ष्णेय ने बताया कि इस दिन शिव और नाग देवता की पूजा करने से सुख-शांति, मानसिक शांति और विजय की कामना की जाती है। श्रावण शुक्ल पंचमी को मनाई जाने वाली नागपंचमी पर भगवान शिव और नाग देवता की आराधना का विशेष महत्व है। नागपंचमी पर पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6:15 से 8:31 बजे तक रहेगा। इस दिन शुभ योग, मुद्गर योग और गजकेसरी योग का संयोग रहेगा। चंद्रमा चित्रा नक्षत्र में रहेंगे।

नागों को दूध न पिलाएं

वहीं सुबह 7:59 बजे सूर्य स्वराशि सिंह में प्रवेश करेंगे। श्रद्धालु सुबह स्नान के बाद मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक करें। इसके बाद नाग देवता की प्रतिमा का जल और कच्चे दूध से अभिषेक कर पुष्प, चंदन, अक्षत, हल्दी और फल अर्पित करें। अनंत, वासुकी, तक्षक, कर्कोटक, पद्म, महापद्म, शंखपाल और कुलिक नागों का स्मरण कर धूप-दीप से आरती करने की परंपरा है। डॉ. पूनम वार्ष्णेय ने बताया कि जीवित नाग को दूध पिलाना उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है, इसलिए नाग को दूध पिलाने के बजाय प्रतिमा का अभिषेक करना चाहिए। 

नागपंचमी की पूजा विधि

सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।

गाय के गोबर से नाग का आकार बनाएं।

नाग देवता का आह्वान करें और ध्यान लगाएं।

व्रत रखना हो तो संकल्प लें।

मेवा, गुलाल, अबीर, मेहंदी, फूल और दूध नाग देवता को अर्पित करें।

मंत्रों का जाप करें।

पूजा के बाद मनोकामना की प्रार्थना करें।

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