नई दिल्ली : नीट परीक्षा में पेपर लीक रोकने के लिए बड़े बदलाव ।
नई दिल्ली , अचल वार्ता । केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाने और परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए व्यापक सुधार लागू किए गए हैं। सरकार का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीकी रूप से मजबूत बनाना है।
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष दाखिल हलफनामे में शिक्षा मंत्रालय ने कहा कि नई व्यवस्था के तहत परीक्षा सुरक्षा, गोपनीयता और संस्थागत सूचनाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है, ताकि भविष्य में पेपर लीक या अन्य अनियमितताओं की पुनरावृत्ति न हो।
सरकार ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) शिक्षा मंत्रालय के अधीन कार्य करती है, जबकि नीट परीक्षा का आयोजन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से किया जाता है। यह हलफनामा सुप्रीम कोर्ट के 29 मई के निर्देश के अनुपालन में दाखिल किया गया है।
केंद्र ने बताया कि संसद द्वारा पारित सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन अधिनियम-2026 के माध्यम से परीक्षा में धोखाधड़ी रोकने के लिए कानूनी प्रावधानों को और सख्त किया गया है।
परीक्षा प्रणाली में संरचनात्मक सुधार और आधुनिकीकरण के लिए केंद्र सरकार ने नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय टास्क फोर्स का गठन भी किया है। यह टास्क फोर्स तीन महीने के भीतर अपनी सिफारिशें देगी, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और ब्लॉकचेन जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर विशेष जोर रहेगा।
हलफनामे के अनुसार, एनटीए ने परीक्षा संचालन के लिए 10-स्तरीय सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किया है, जिसे "किले जैसी सुरक्षा व्यवस्था" बताया गया है। प्रश्नपत्र तैयार करने के शुरुआती चरण में ऑफलाइन (एयर-गैप्ड) एआई सिस्टम का उपयोग किया जा रहा है, जिसके बाद सीमित मानवीय सत्यापन किया जाता है।
इसके अलावा प्रत्येक प्रश्नपत्र और ओएमआर शीट को अभ्यर्थी से जुड़े यूनिक सीरियल नंबर से जोड़ा गया है। प्रश्नपत्रों की पैकिंग छह-स्तरीय छेड़छाड़-रोधी सुरक्षा प्रणाली के तहत की जा रही है। इन्हें विशेष स्टील ट्रंकों में रखा जाता है, जिन पर एक बार उपयोग होने वाले सुरक्षा लॉक लगाए जाते हैं, जिन्हें केवल काटकर ही खोला जा सकता है।
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