हरदोई : गुजीदेई गांव में पानी में खड़ा बिजली ट्रांसफार्मर, क्या हादसे का इंतजार कर रहा विभाग?
- पांच फीट गहरे पानी में डूबे विद्युत पोल, बच्चों और पशुओं की आवाजाही से बढ़ा खतरा
हरदोई, अचल वार्ता। कांवड़ यात्रा को लेकर जिला प्रशासन और बिजली विभाग विद्युत हादसों से बचाव के लिए कांवड़ मार्गों पर विशेष सतर्कता बरतने का दावा कर रहा है। विद्युत पोलों पर प्लास्टिक पन्नी लपेटकर श्रद्धालुओं को करंट से बचाने के इंतजाम किए जा रहे हैं। वहीं पाली विद्युत उपकेंद्र के परेली फीडर से जुड़े गुजीदेई गांव में बिजली विभाग की लापरवाही हादसे को न्योता देती नजर आ रही है। गांव के पश्चिमी छोर पर करीब पांच फीट गहरे पानी के बीच बिजली का ट्रांसफार्मर खड़ा है। इसके दोनों विद्युत पोल भी जलभराव में डूबे हुए हैं।
ट्रांसफार्मर और विद्युत पोलों के आसपास बच्चों तथा पशुओं की आवाजाही बनी रहती है। ऐसे में यदि विद्युत उपकरणों में करंट का रिसाव हुआ तो पानी के संपर्क में आने वाला व्यक्ति या पशु इसकी चपेट में आ सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में यहां हर वर्ष जलभराव होता है, लेकिन समस्या के स्थायी समाधान के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।जलभराव के कारण बिजली के ट्रांसफार्मर तक पहुंचना भी मुश्किल है। बिजली आपूर्ति में खराबी आने पर लाइनमैन को पानी में उतरकर मरम्मत करनी पड़ती है। रात के समय यह काम और भी जोखिम भरा हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि विभागीय कर्मचारियों की सुरक्षा का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
कांवड़ मार्गों पर पन्नी, गांव में पानी के बीच बिजली
कांवड़ यात्रा के दौरान करंट से बचाव के लिए विभाग कांवड़ मार्गों पर विद्युत पोलों को प्लास्टिक पन्नी से ढक रहा है। ऐसे में ग्रामीणों का सवाल है कि जब श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए विद्युत पोलों पर पन्नी लगाई जा रही है तो गांव में पानी के बीच खड़े ट्रांसफार्मर और जलमग्न पोलों की सुरक्षा के लिए कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय विभाग को पहले ही खतरे को खत्म करना चाहिए।
जेई के सीयूजी नंबर को उठाता कर्मचारी
पाली विद्युत उपकेंद्र के अवर अभियंता सुखपाल के जाने के बाद दीपक को नया जेई बनाया गया है। समस्या की जानकारी देने के लिए उनके सीयूजी नंबर पर संपर्क किया गया तो फोन एक कर्मचारी ने उठाया। कर्मचारी ने बताया कि नंबर अभी जेई को दिया जाना है। ऐसे में गंभीर विद्युत समस्या की सूचना जिम्मेदार अधिकारी तक पहुंचाने की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और बिजली विभाग से तत्काल मामले का संज्ञान लेने की मांग की है। उन्होंने जलभराव की निकासी कराने, ट्रांसफार्मर को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने और विद्युत पोलों के आसपास सुरक्षा घेरा बनाने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते खतरा दूर नहीं किया गया तो पानी में खड़ा यह ट्रांसफार्मर और जलमग्न विद्युत पोल किसी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। ऐसे में सवाल यह है कि विभाग इस खतरे को हादसे से पहले देखेगा या फिर किसी अनहोनी के बाद जागेगा?
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