देहरादून : अमित शाह ने उत्तराखण्ड पुलिस को राष्ट्रपति पुलिस निशान से किया सम्मानित
देहरादून, अचल वार्ता । मा. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखण्ड पुलिस को राष्ट्रपति पुलिस निशान प्राप्त होने पर सभी अधिकारियों एवं जवानों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उत्तराखण्ड पुलिस के साहस, कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन और जनसेवा को मिली राष्ट्रीय मान्यता है। यह उपलब्धि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक के लिए गर्व का विषय है।
मा. मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी का देवभूमि उत्तराखण्ड आगमन पर स्वागत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व एवं केंद्रीय गृह मंत्री के मार्गदर्शन में देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था लगातार सुदृढ़ हुई है। आतंकवाद और नक्सलवाद के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई, तीन नए आपराधिक कानूनों का क्रियान्वयन तथा पुलिस बलों का आधुनिकीकरण इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
मा. मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य गठन के समय उत्तराखण्ड पुलिस में लगभग 13 हजार जवान, 96 थाने और 42 चौकियां थीं। आज 26 हजार से अधिक पुलिसकर्मी प्रदेश की सुरक्षा और सेवा में कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि देश की पहली महिला पुलिस महानिदेशक स्वर्गीय श्रीमती कंचन चौधरी भट्टाचार्य ने उत्तराखण्ड पुलिस का नेतृत्व किया, यह प्रदेश के लिए गौरव की बात है। वर्तमान में उत्तराखण्ड पुलिस में महिलाओं की भागीदारी लगभग 14 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।
मा. मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड पुलिस कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ ही चारधाम यात्रा, पर्यटन, यातायात प्रबंधन, आपदा राहत एवं बचाव कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद पुलिस के अधिकारी एवं जवान पूरी संवेदनशीलता और समर्पण के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं।
मा. मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा संचालित ड्रग्स फ्री देवभूमि अभियान के अंतर्गत पिछले चार वर्षों में पुलिस ने 7 हजार से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया है तथा 307 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के अवैध मादक पदार्थ जब्त किए हैं। ऑपरेशन स्माइल के माध्यम से गुमशुदा बच्चों को उनके परिजनों से मिलाने तथा ऑपरेशन मुक्ति के तहत भिक्षावृत्ति में लगे बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए भी निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
मा. मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश में समान नागरिक संहिता, धर्मांतरण विरोधी कानून तथा दंगारोधी कानून लागू किए गए हैं। सरकारी भूमि को अवैध अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए भी व्यापक स्तर पर कार्रवाई की गई है।
मा. मुख्यमंत्री ने कहा कि साइबर अपराधों की रोकथाम और प्रभावी जांच के लिए स्टेट साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर की स्थापना की दिशा में कार्य किया जा रहा है। नरेंद्रनगर स्थित पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रशिक्षण और संसाधनों के माध्यम से उत्तराखण्ड पुलिस को और अधिक सक्षम बनाया जा रहा है।
मा. मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति पुलिस निशान केवल सम्मान ही नहीं, बल्कि जनसेवा के प्रति हमारी जिम्मेदारियों को और अधिक बढ़ाने वाला गौरवपूर्ण प्रतीक भी है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उत्तराखण्ड पुलिस भविष्य में भी अपने साहस, अनुशासन, संवेदनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा से प्रदेशवासियों का विश्वास मजबूत करती रहेगी।
राष्ट्रपति पुलिस निशान हमारी गौरवशाली विरासत, वर्तमान दायित्व और भविष्य के संकल्प का प्रतीक : डीजीपी
इस वर्ष राज्य स्थापना दिवस समारोह का यह गौरवपूर्ण अवसर उत्तराखण्ड पुलिस के लिए भी एक विशेष ऐतिहासिक उपलब्धि का साक्षी बन रहा है। ‘राष्ट्रपति पुलिस निशान’ से अलंकृत होना हमारे लिए केवल एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान की प्राप्ति नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड पुलिस की गौरवशाली सेवा परंपरा, कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन, अदम्य साहस और जनसेवा के प्रति अटूट समर्पण का राष्ट्रीय स्तर पर अनुमोदन एवं सम्मान है। यह सम्मान हमारे प्रत्येक पुलिसकर्मी के परिश्रम, त्याग और समर्पण का प्रतीक है।
माननीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह जी, आपके कर-कमलों से उत्तराखंड पुलिस को यह प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त होना हमारे लिए विशेष गौरव का विषय है। आपकी गरिमामयी उपस्थिति इस अवसर को और अधिक स्मरणीय बना रही है। उत्तराखंड पुलिस परिवार की ओर से मैं आपका हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन करता हूँ।
राष्ट्रपति पुलिस निशान किसी बल के लिए केवल एक औपचारिक प्रतीक नहीं होता। यह उस चरित्र का परिचायक होता है, जो कठिन परिस्थितियों में भी कर्तव्य से विमुख नहीं होता; उस अनुशासन का प्रतीक होता है, जो जनहित को व्यक्तिगत हित से ऊपर रखता है और उस विश्वास का परिचायक होता है, जिसे पुलिस अपने आचरण से अर्जित करती है।
यह निशान हमारे अतीत के परिश्रम का सम्मान, वर्तमान के दायित्वों का स्मरण और भविष्य की उत्कृष्टता का संकल्प है।
इस अवसर पर मैं उत्तराखंड पुलिस के सभी सेवारत एवं सेवानिवृत्त अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ। उनके अनुभव, परिश्रम और समर्पण ने इस बल की सेवा-परंपरा को सशक्त किया है।
आज हम अपने उन वीर साथियों को भी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, जिन्होंने कर्तव्यपालन के दौरान सर्वोच्च बलिदान दिया। उनकी वीरता और समर्पण हमारी अमूल्य धरोहर हैं। उनके परिजनों के प्रति उत्तराखंड पुलिस परिवार सदैव सम्मान, संवेदना और कृतज्ञता का भाव रखता है।
उत्तराखंड पुलिस के लिए यह सम्मान इसलिए भी विशिष्ट है, क्योंकि हमारी कार्यभूमि जितनी सुंदर और आध्यात्मिक है, उतनी ही चुनौतीपूर्ण और संवेदनशील भी है।
हिमालय की दुर्गम पर्वत शृंखलाएँ, कठिन मौसम, दूरस्थ गाँव, अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से लगे क्षेत्र, देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक तथा प्राकृतिक आपदाओं की आशंका—इन सबके बीच पुलिस को निरंतर सतर्कता, तत्परता और संवेदनशीलता के साथ कार्य करना होता है।
एक ओर प्रदेश में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती होती है, वहीं दूसरी ओर चारधाम यात्रा, कुंभ मेला, कांवड़ यात्रा और अन्य बड़े आयोजनों में लाखों लोगों की सुरक्षा एवं सुविधा सुनिश्चित करनी होती है। किसी आपदा के समय हमारी भूमिका जीवन बचाने, राहत पहुँचाने और संकटग्रस्त लोगों के लिए भरोसे का आधार बनने तक विस्तृत हो जाती है।
इन सभी दायित्वों के निर्वहन में उत्तराखंड पुलिस का प्रत्येक सदस्य अपना अमूल्य योगदान देता है। कार्यस्थल अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन हम सभी का उद्देश्य एक ही है—जनता की सुरक्षा और कानून के शासन की स्थापना।
आज पुलिसिंग का स्वरूप भी तेजी से बदल रहा है। साइबर अपराध, डिजिटल वित्तीय धोखाधड़ी, संगठित अपराध और नशा तस्करी जैसी चुनौतियाँ पारंपरिक पुलिसिंग से आगे की क्षमताओं की माँग करती हैं। उत्तराखंड पुलिस आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक अनुसंधान, बेहतर प्रशिक्षण और अंतर-एजेंसी समन्वय को अपनाते हुए स्वयं को अधिक दक्ष, सक्षम और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में निरंतर अग्रसर है।
आज का यह सम्मान हम सभी का है—उन पुलिसकर्मियों का, जो कठिन परिस्थितियों में भी कर्तव्यपथ पर अडिग रहते हैं; उन परिवारों का, जो उनका संबल बनते हैं; और उन सभी का, जिनके विश्वास से पुलिस सेवा को सार्थकता प्राप्त होती है।
मैं उत्तराखंड पुलिस के प्रत्येक सदस्य की ओर से यह संकल्प व्यक्त करता हूं कि हम इस ‘राष्ट्रपति निशान’ के सम्मान को अपने आचरण, और कार्यकुशलता से निरंतर नई ऊँचाइयों पर ले जाएंगे। साथ ही, ‘कर्म, सत्यं, शौर्यं’ के ध्येय वाक्य को आत्मसात करते हुए प्रदेशवासियों की सुरक्षा और जनसेवा के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन पूर्ण निष्ठा और समर्पण से करते रहेंगे।
इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी, तीरथ सिंह रावत एवं डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, प्रदेश सरकार के मंत्रीगण, सांसदगण, विधायकगण, मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ सहित विभिन्न दायित्वधारी, जनप्रतिनिधिगण, शासन एवं पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे
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