प्रदेश के आयुष चिकित्सालयों में मरीजों को मिल रहा है गुणवत्तापूर्ण उपचार
लखनऊ, अचल वार्ता। आयुष के अन्तर्गत आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, होम्योपैथी तथा सिद्ध चिकित्सा पद्धतियाँ शामिल हैं। इसमें आयुर्वेद एवं योग पद्धति भारत के ऋषि-मुनियों द्वारा वर्षों के अनुसंधान एवं अनुभव के आधार पर विकसित की गयी है। इसका उल्लेख वेदों विशेषकर अथर्ववेद में मिलता है। माना जाता है कि इसे ब्रम्हा जी ने प्रतिपादित किया, जिसे आगे चलकर ऋषि च्यवन, धनवन्तरी और चरक-सुश्रुत जैसे ऋषियों ने आगे बढ़ाया। आयुर्वेद विश्व के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए एक वरदान है। विश्व में आयुष पद्धतियों को सर्वग्राहय एवं लोकप्रिय बनाने के उद्देश्य से भारत सरकार ने वर्ष 2014 में पृथक विभाग के रूप में आयुष मंत्रालय का गठन किया गया। जिसके उपरान्त वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आयुष विभाग का नये विभाग के रूप में पुर्नगठन किया। इससे पूर्व यह विभाग चिकित्सा शिक्षा विभाग के अन्तर्गत संचालित था। आयुष चिकित्सा पद्धति केवल बीमारियों का इलाज ही नहीं, बल्कि जीवन शैली के माध्यम से स्वास्थ्य को संतुलित रखने पर ध्यान केन्द्रित करती है।वर्तमान में प्रदेश के विभिन्न जनपदों में बहिरंग आयुष डिस्पेन्सरी संचालित है। 2111 आयुर्वेदिक, 254 यूनानी एवं 1,585 से अधिक हॉम्योपैथिक कुल 3,950 आयुष चिकित्सालयों के साथ ही 19 आयुष महाविद्यालय, 08 आयुर्वेदिक, 02 यूनानी एवं 09 होम्योपैथिक कालेज एवं उनसे सम्बद्ध चिकित्सालय संचालित हैं। कालेजों एवं चिकित्सालयों के माध्यम से प्रदेश के ग्रामीण एवं शहरी जनता को आयुर्वेदिक, यूनानी एवं होम्योपैथिक चिकित्सा एवं चिकित्सा शिक्षा उपलब्ध करायी जा रही है। प्रदेश सरकार आयुष विधा को और अधिक सुदृढ़ किये जाने हेतु सतत् जागरूक एवं प्रयासरत है। इसी दिशा में वर्तमान सरकार द्वारा प्राथमिकता के आधार पर इन चिकित्सा पद्धतियों को विकसित किया जा रहा है।
प्रदेश में संचालित राजकीय एवं निजी आयुष महाविद्यालयों में शैक्षणिक सत्र के नियमन एवं प्रदेश में एकरुपता तथा योग एवं नेचुरोपैथी में उत्कृष्ट शोध को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रदेश के जनपद गोरखपुर में महायोगी गुरू गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय स्थापित किया गया है, जो पारम्परिक आयुर्वेद की शिक्षा और अनुसंधान का केन्द्र है। विश्वविद्यालय द्वारा प्रदेश के आयुष महाविद्यालयों को सम्बद्ध करते हुये, सुचारू रूप से संचालन किया जा रहा है।
वर्तमान में 16 जनपदों (लखनऊ, वाराणसी, कानपुर नगर, कानपुर देहात, बरेली, कौशाम्बी, ललितपुर, संतकबीरनगर, सोनभद्र अमेठी, देवरिया, रायबरेली, बस्ती, जालौन बागपत एवं बलिया) में 50 शैय्या एकीकृत आयुष चिकित्सालय संचालित किये जा रहे है, इन चिकित्सालयों में वर्ष 2024-25 में कुल 6.70 लाख मरीजों को चिकित्सकीय लाभ दिया गया। 6,798 मरीज अंत:रोगी विभाग के माध्यम से देखे गये। कुल 59,354 मरीजों ने पंचकर्म की सुविधा का लाभ उठाया, 447 माइनर सर्जरी सम्पन्न हुयी एवं 29,818 लैब टेस्ट किये गये है। प्रदेश के 03 जनपदों बुलन्दशहर, उन्नाव एवं फतेहपुर में निर्माण कार्य पूर्ण हो गया है। प्रदेश के 06 जनपदों यथा श्रावस्ती, हरदोई, गोरखपुर, सम्भल एवं मिर्जापुर, मेरठ में आयुष चिकित्सालय निर्माण कार्य प्रगति पर है।
प्रदेश के जन- सामान्य को ''स्वास्थ्य हेतु हितकर जीवन शैलीÓÓ का अनुसरण करने एवं प्रेरित करने के लिए ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के निवासियों को योग एवं आयुर्वेद सम्बंधी लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से ष्आयुष्मान भारतष् कार्यक्रम के अन्तर्गत प्रदेश में आयुष आरोग्य मन्दिर (हैल्थ वेलनेस सेण्टर) स्थापित किये गये हैं। प्रदेश के 1034 राजकीय आयुर्वेदिक, होम्योपैथी एवं यूनानी चिकित्सालयों को चयनित कर आयुष आरोग्य मन्दिर (हेल्थ वेलनेस सेण्टर) के रूप में संचालित किये जा रहे हैं। प्रदेश के विभिन्न जनपदों में वर्तमान में कुल 225 योग वेलनेस सेण्टर संचालित किये जा रहे हैं। इन सेण्टर के माध्यम से जनसामान्य को स्वस्थ बनाये रखने के लिये प्रात: एवं सायं योग का प्रशिक्षण दिया जाता है। चिकित्सालय की अवधि में गैरसंचारी रोगों जैसे मधुमेह, उच्च रक्तचाप, तनाव आदि से पीडि़त रोगियों का योग एवं प्राकृतिक उपचार के माध्यम से उपचार किया जा रहा है।
आयुष पद्धति के विकास एवं गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा उपलब्ध कराये जाने के उद्देश्य से जनपद अयोध्या में आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय, जनपद बरेली में यूनानी महाविद्यालय एवं चिकित्सालय तथा वाराणसी में राजकीय होम्योपैथिक महाविद्यालय एवं अस्पताल की स्थापना की गई है। जनपद-वाराणसी में नैचुरोपैथी केन्द्र एवं पंचकर्म हट्स का निर्माण, जनपद-जौनपुर में 30 शैय्या एकीकृत आयुष चिकित्सालय का निर्माण, जनपद लखनऊ में 50 शैय्या जिला यूनानी चिकित्सालय का निर्माण कराया जा रहा है।
छात्रों को गुणवत्ता पूर्ण अध्ययन-अध्यापन हेतु जनपद लखनऊ के राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय, राजकीय होम्योपैथी मेडिकल कालेज, राजकीय तकमील- उत्तिब यूनानी कालेज में 3-डी एनाटोमेज टेबल स्थापित किये जाने का लक्ष्य है। छात्रों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से पढ़ाये जाने के लिये 17 आयुर्वेद एवं होम्योपैथी महाविद्यालयों के 51 क्लास रूम को स्मार्ट क्लास के रूप में विकसित किया जा रहा है। आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सालयों में प्रमाणित एवं गुणकारी औषधियों की आपूर्ति हेतु राजकीय औषधि निर्माणशालाए लखनऊ एवं पीलीभीत में संचालित है।
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