सोनीपत: 10 से 11 बार असफलता के बाद अभिषेक सरोहा ने रचा इतिहास, HCS-2026 में हरियाणा में किया टॉप

Oct 10, 2026 - 17:24
Oct 11, 2026 - 19:54
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सोनीपत: 10 से 11 बार असफलता के बाद अभिषेक सरोहा ने रचा इतिहास, HCS-2026 में हरियाणा में किया टॉप

गोहाना , अचल वार्ता। हरियाणा के गोहाना निवासी अभिषेक सरोहा ने एचसीएस परीक्षा-2026 में पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान हासिल कर अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार में खुशी का माहौल है। सेक्टर-7 स्थित उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। परिवार और शहरवासी ढोल-नगाड़ों के साथ उनकी सफलता का जश्न मना रहे हैं। अभिषेक की यह कामयाबी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो बार-बार असफल होने के बाद हिम्मत हार जाते हैं।

अभिषेक वर्ष 2020 से यूपीएससी की तैयारी कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने पांच बार मुख्य परीक्षा (मेन्स) दी और दो बार इंटरव्यू तक पहुंचे, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो सका। यूपीपीसीएस परीक्षा में वह महज चार अंकों से चयन से चूक गए थे। वहीं, पिछली एचसीएस परीक्षा में भी उनका चयन केवल डेढ़ अंक से रह गया था। अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं में करीब 10 से 11 बार असफलताओं का सामना करने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य की ओर लगातार प्रयास करते रहे।
सेल्फ स्टडी को बनाया सफलता का आधार
अभिषेक ने शुरुआत में विजन आईएएस से एक साल तक कोचिंग ली। इसके बाद उन्होंने स्वाध्याय यानी सेल्फ स्टडी पर अधिक ध्यान दिया। उनका मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को परिणाम की चिंता करने के बजाय अपनी रोजाना की पढ़ाई, नियमित दिनचर्या और कमजोर विषयों में सुधार पर ध्यान देना चाहिए। लगातार मेहनत और अनुशासन से ही लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
अभिषेक को एचसीएस परीक्षा में चयन की उम्मीद थी, लेकिन पूरे हरियाणा में प्रथम स्थान हासिल होगा, इसका उन्हें अंदाजा नहीं था। उनके चाचा तेजेंद्र सरोहा के अनुसार, अभिषेक प्रतिदिन करीब 10 घंटे पढ़ाई करते थे। उनकी इसी लगन और मेहनत का परिणाम है कि आज उन्होंने प्रदेशभर में पहला स्थान हासिल किया है।
ट्रेनिंग के साथ यूपीएससी की तैयारी भी रखेंगे जारी
अभिषेक अब ट्रेनिंग के दौरान प्रशासनिक कार्यों को सीखकर अपनी जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से निभाना चाहते हैं। इसके साथ ही यूपीएससी परीक्षा का एक प्रयास अभी बाकी है, जिसे वह आजमाना चाहते हैं।
अभिषेक की सफलता की कहानी यह संदेश देती है कि असफलता मंजिल का अंत नहीं, बल्कि सीखने और आगे बढ़ने का अवसर है। लगातार प्रयास, आत्मविश्वास और अनुशासन के बल पर मुश्किल लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं।

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