अंबेडकर नगर : मंदिर की जमीन पर अवैध निर्माण का खेल, हरैया में रसोई रेस्टोरेंट बना चर्चा का विषय
अचल वार्ता , अंबेडकरनगर। बसखारी थाना क्षेत्र के हरैया गांव से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि मंदिर की पैतृक जमीन पर अवैध रूप से रसोई रेस्टोरेंट का निर्माण कराया गया है। मंदिर के वर्तमान महंत रामजी दास ने दावा किया कि बाबू राम वर्मा पुत्र रामसुमरन निवासी हरैया ने मंदिर की भूमि पर कब्जा कर रेस्टोरेंट खड़ा कर दिया है, जिससे मंदिर के अस्तित्व को खतरा उत्पन्न हो गया है। दानपत्र के नाम पर कब्जे का खेल? पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व महंत दयाराम दास ने बाबू राम वर्मा के नाम दानपत्र के जरिए यह जमीन हस्तांतरित की थी।
महंत और ग्रामीणों का दावा मंदिर के वर्तमान महंत
रामजी दास और ग्रामीणों का कहना है कि मंदिर अथवा ट्रस्ट की संपत्ति किसी भी व्यक्ति को दान देना कानूनन संभव नहीं है। कानून विशेषज्ञों का मत है कि मंदिर की संपत्ति धार्मिक न्यास (Religious Trust Property) के अंतर्गत आती है, जिसे न तो बेचा जा सकता है और न ही निजी स्वार्थ के लिए दान किया जा सकता है। इस विवादित जमीन का मामला फिलहाल न्यायालय में लंबित है।
मंदिर दान लेता है, देता नहीं!
ग्रामीणों में चर्चा है कि मंदिर हमेशा दान प्राप्त करता है, लेकिन मंदिर की जमीन किसी निजी व्यक्ति के नाम दान करना पूरी तरह अवैध और आस्था के साथ खिलवाड़ है। ग्रामीणों का कहना है कि यह धार्मिक भावनाओं पर सीधा हमला है और मामले की गहन जांच होनी चाहिए।
अदालत में लंबित मामला, फिर भी जारी निर्माण
स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि जब मामला अदालत में विचाराधीन है, तो विवादित जमीन पर रेस्टोरेंट का निर्माण किसके दबाव में कराया गया? ग्रामीणों का आरोप है कि राजस्व विभाग और प्रशासन प्रभावशाली लोगों के दबाव में ढिलाई बरत रहा है। उनका कहना है कि यह कब्जा न केवल धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचाता है, बल्कि सामाजिक-सांस्कृतिक विरासत को भी नुकसान पहुंचाता है।
बाबू राम वर्मा पर उठे सवाल ग्रामीणों व महंत ने बाबू राम वर्मा पर अवैध कब्जे का आरोप लगाते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि दानपत्र अवैध पाया गया, तो यह आपराधिक कृत्य होगा और दोषियों पर धार्मिक संपत्ति कानून के साथ-साथ आपराधिक धाराओं में भी कार्रवाई होनी चाहिए।
कानूनी प्रावधान
कानून विशेषज्ञों के अनुसार, धार्मिक न्यास की संपत्ति का हस्तांतरण अवैध है तथा आपराधिक विश्वासघात,धोखाधड़ी और जालसाजी के तहत आता है।ऐसे मामलों में भारतीय दंड संहिता की धारा 406,420 एवं 467 के अंतर्गत सख्त कार्रवाई हो सकती है।
कार्रवाई न होने पर सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने के बावजूद अब तक ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। सवाल उठ रहे हैं कि क्या प्रभावशाली लोगों के दबाव में प्रशासन चुप्पी साधे हुए है? ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री से उच्चस्तरीय जांच कराते हुए मंदिर की जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराने की मांग की है।
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