अयोध्या: सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ विश्वविद्यालय सख्त, कानूनी कार्रवाई का प्रस्ताव पारित
अयोध्या, अचल वार्ता। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में सोशल मीडिया के माध्यम से अफवाह और भ्रामक जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया गया है। कुलपति कार्यालय समिति हाल में आयोजित आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) की बैठक में इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा की गई और दोषियों के विरुद्ध कानूनी नोटिस भेजने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया।
कुलपति की अध्यक्षता में हुई अहम बैठक
यह बैठक विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह की अध्यक्षता में आयोजित की गई, जिसमें विश्वविद्यालय के सभी अधिष्ठाता और निदेशक उपस्थित रहे। बैठक में शैक्षिक गुणवत्ता, अनुसंधान, प्रसार कार्यों और सामाजिक सहभागिता से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।
शैक्षिक और शोध गतिविधियों को मजबूत करने पर जोर
कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह ने विश्वविद्यालय के शैक्षिक, प्रसार एवं शोध कार्यों को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए गांवों में संकाय सदस्यों और छात्र-छात्राओं की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
इसके साथ ही बाल गृह में विभिन्न गतिविधियों के आयोजन के माध्यम से बच्चों को स्वावलंबी बनाने पर भी जोर दिया गया।
प्रशिक्षण अनुभव साझा करने के निर्देश
कुलपति ने कहा कि जो वैज्ञानिक अन्य संस्थानों से प्रशिक्षण लेकर आए हैं, वे अपने संकाय सदस्यों के साथ अपने अनुभव साझा करें, ताकि विश्वविद्यालय की अकादमिक और शोध क्षमता में और वृद्धि हो सके।
अफवाह फैलाने की निंदा, सख्त कदम का फैसला
बैठक में यह भी बताया गया कि पिछले छह वर्षों में विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न गतिविधियों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इसके बावजूद कुछ असामाजिक तत्व सोशल मीडिया के माध्यम से विश्वविद्यालय और व्यक्तिगत रूप से कुलपति की छवि को धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं।
इस पर सभी अधिष्ठाताओं और निदेशकों ने एक स्वर में घोर निंदा की और ऐसे तत्वों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता जताई।
कानूनी नोटिस भेजने का प्रस्ताव पारित
बैठक में निर्णय लिया गया कि सोशल मीडिया पर अफवाह और भ्रामक जानकारी फैलाने वालों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कानूनी नोटिस भेजा जाएगा, ताकि विश्वविद्यालय की गरिमा और शैक्षणिक माहौल को सुरक्षित रखा जा सके।
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