अम्बेडकर नगर: जब आधार बना बिल, और भुगतान हुआ जादू से..

अंबेडकर नगर के बसखारी ब्लॉक की ग्राम पंचायत बनियानी में आधार कार्ड को बिल-वाउचर बनाकर सरकारी धन निकासी का मामला सामने आया, ग्रामीणों ने जांच की मांग की।

Jan 18, 2026 - 09:32
Jan 24, 2026 - 20:44
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अम्बेडकर नगर: जब आधार बना बिल, और भुगतान हुआ जादू से..

जनपद में डिजिटल भ्रष्टाचार का खुलासा, ग्राम पंचायत में आधार कार्ड बना बिल–वाउचर...

अंबेडकर नगर, अचल वार्ता। बसखारी विकासखंड के अंतर्गत ग्राम पंचायत बनियानी में भ्रष्टाचार ने तकनीक के साथ ऐसा गठजोड़ किया है कि सरकारी नियम भी शर्मसार हो जाएँ। यहाँ आधार कार्ड अब पहचान पत्र नहीं, बल्कि बिल और वाउचर की भूमिका निभाता नजर आ रहा है। न कोई कार्यस्थल, न निर्माण सामग्री और न ही कार्य विवरण—फिर भी सरकारी धन का भुगतान पूरे “डिजिटल ठाठ” से कर दिया गया।

ग्रामीणों के अनुसार अप्रैल 2025 में ग्राम पंचायत सचिव राजीव वर्मा द्वारा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया। ग्राम सभा कोडरा के एक व्यक्ति का आधार कार्ड ही पोर्टल पर बिल–वाउचर के रूप में अपलोड कर दिया गया, जिसके आधार पर सरकारी खाते से भुगतान निकाल लिया गया।

आधार कार्ड से हुआ भुगतान

जानकारी के अनुसार इस कथित डिजिटल खेल के जरिए—

  • 11,292 रुपये
  •  21,000 रुपये

सीधे ग्राम पंचायत बनियानी के खाते से निकाल लिए गए। हैरानी की बात यह है कि काम क्या हुआ, इसका कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। न फाइलों में कार्य विवरण है और न ही मौके पर किसी निर्माण के प्रमाण।

बिना बिल–वाउचर निकाले गए 70 हजार रुपये

मामला यहीं नहीं रुका। आरोप है कि बिना किसी बिल, बिना वाउचर और बिना कार्य के 70,164 रुपये की अतिरिक्त राशि भी निकाल ली गई। ग्रामीणों का कहना है कि यह भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि “दाएँ हाथ से बाएँ हाथ का डिजिटल खेल” है, जिसमें नियम सिर्फ दर्शक बने रहे और सिस्टम ने आंखें मूँद लीं।

नियमों की उड़ाई गई धज्जियां....

सरकारी नियमों के अनुसार बिल और वाउचर अपलोड करना ग्राम पंचायत सचिव की जिम्मेदारी होती है, लेकिन इस मामले में ऐसा प्रतीत होता है कि—

“जब आधार है, तो कागज़ किस काम का?”

ग्रामीणों ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग

ग्रामीणों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए सवाल उठाए हैं—

  • काम हुआ कितना?
  • भुगतान किस कार्य के नाम पर किया गया?
  •  जिम्मेदारी किस अधिकारी की तय होगी?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि—

  •  जब आधार कार्ड ही बिल बन जाए,
  •  तो भ्रष्टाचार पकड़ा कैसे जाए?

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इसे “तकनीकी त्रुटि” मानकर फाइलों में दबा देता है या फिर इस डिजिटल भ्रष्टाचार के जादू का सच जनता के सामने लाया जाता है।

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