अम्बेडकर नगर: नैनो उर्वरकों से मृदा स्वास्थ्य संरक्षण व टिकाऊ कृषि को मिलेगा बढ़ावा
अम्बेडकरनगर में “धरती माता बचाओ अभियान” के तहत नैनो उर्वरकों के महत्व व उपयोग पर जनपद स्तरीय चर्चा आयोजित। कृषि विभाग व इफको अधिकारियों ने टिकाऊ खेती और मृदा स्वास्थ्य संरक्षण पर जोर दिया।
- नैनो उर्वरकों से बदलेगी खेती की तस्वीर, मृदा स्वास्थ्य व उत्पादन दोनों होंगे बेहतर
- नैनो उर्वरकों से टिकाऊ खेती की ओर कदम, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण पर जोर
अम्बेडकरनगर, अचल वार्ता। मृदा स्वास्थ्य संरक्षण एवं टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषि भवन सभागार, अम्बेडकरनगर में “धरती माता बचाओ अभियान” के अंतर्गत नैनो उर्वरकों के महत्व एवं उपयोग पर जनपद स्तरीय सामूहिक चर्चा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कृषि विभाग के अधिकारियों, विशेषज्ञों एवं किसानों ने भाग लेकर आधुनिक कृषि तकनीकों पर विचार-विमर्श किया।
नैनो उर्वरकों से कम लागत में बेहतर उत्पादन
कार्यक्रम में इफको के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. देवी प्रसाद ने नैनो उर्वरकों की उपयोगिता पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नैनो उर्वरक कम मात्रा में प्रयोग किए जाने के बावजूद अधिक प्रभावी परिणाम देते हैं, जिससे लागत घटती है और उत्पादन में वृद्धि होती है। उन्होंने कहा कि कृषि विभाग के सहयोग से किसानों के खेतों में नैनो उर्वरकों का प्रयोग कराया जाएगा, ताकि किसान इसके प्रत्यक्ष लाभ देख सकें।
मृदा स्वास्थ्य बेहतर होगा तो मानव स्वास्थ्य भी रहेगा सुरक्षित
जिला कृषि अधिकारी अरविंद चौधरी ने रासायनिक उर्वरकों के सीमित उपयोग, समुचित प्रबंधन एवं एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (आईएनएम) की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि खेत की मिट्टी का स्वास्थ्य जितना बेहतर होगा, उतना ही मानव शरीर का स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा। इसी कारण किसानों को संतुलित उर्वरक प्रयोग एवं आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाना चाहिए।
अंधाधुंध रासायनिक उर्वरक प्रयोग पर जताई चिंता
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए इफको के डीजीएम नायक ने कहा कि किसानों को टिकाऊ खेती की दिशा में आगे बढ़ना होगा। वहीं कृषि निदेशक डॉ. अविनाश सिंह ने कहा कि अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, जबकि नैनो उर्वरकों के उपयोग से उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ मृदा की उर्वरता भी बनी रहती है।
किसानों और विक्रेताओं की रही सक्रिय सहभागिता
कार्यक्रम में उर्वरक थोक एवं फुटकर विक्रेता, कृषि विभाग के अधिकारी तथा बड़ी संख्या में जागरूक किसान उपस्थित रहे। सभी ने नैनो उर्वरकों के प्रयोग को लेकर अपने अनुभव और सुझाव साझा किए।
कार्यक्रम के अंत में जताया गया आभार
अंत में जिला कृषि अधिकारी ने कार्यक्रम की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया और किसानों से अपील की कि वे टिकाऊ एवं वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर मृदा संरक्षण में योगदान दें।
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