अम्बेडकर नगर : सीता देवी हत्याकांड में पुलिस विवेचना पर उठे गंभीर सवाल, न्यायालय ने रिमाण्ड से किया इनकार
अम्बेडकर नगर के टाण्डा क्षेत्र में सीता देवी हत्याकांड की विवेचना पर सवाल उठे हैं। न्यायालय ने पुलिस की लापरवाही पर कड़ी टिप्पणी करते हुए रिमाण्ड बढ़ाने से इनकार कर दिया, जिससे टाण्डा कोतवाली की कार्यप्रणाली फिर चर्चा में आ गई।
अम्बेडकर नगर, अचल वार्ता। जनपद के टाण्डा कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत ग्राम हजलापुर दौलतपुर हाजलपट्टी में हुए सीता देवी हत्याकांड में पुलिस की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। मामला लंबे समय तक सुर्खियों में रहा, लेकिन विवेचना की धीमी और संदिग्ध कार्यशैली ने अब न्यायालय को भी कठोर टिप्पणी करने के लिए मजबूर कर दिया है।
ग्रामीणों के अनुसार, घटना के बाद टाण्डा कोतवाली पुलिस ने गांव के कई लोगों को संदेह के आधार पर पूछताछ के लिए उठाया और बाद में छोड़ दिया। यह सिलसिला कई दिनों तक चला। नाम न छापने की शर्त पर ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पूछताछ के नाम पर निर्दोष लोगों से अवैध वसूली की गई। इस दौरान टाण्डा कोतवाल और पुलिस की भूमिका पर गंभीर आरोप लगे थे।
न्यायालय में खुली विवेचना की पोल
मुकदमा संख्या 391/2025, धारा 103(1) भारतीय न्याय संहिता, थाना टाण्डा में अभियुक्त राहुल पुत्र हीरालाल के विरुद्ध विवेचक द्वारा दिनांक 07 दिसंबर 2025 को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, अम्बेडकर नगर के समक्ष रिमाण्ड प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया। विवेचक का दावा था कि अभियुक्त ने अपनी माता सीता देवी की हत्या पैसे की जरूरत के चलते की और उसके बयान के आधार पर रिमाण्ड की मांग की गई।
हालांकि न्यायालय ने केस डायरी और उपलब्ध साक्ष्यों का गहन अवलोकन करने के बाद पाया कि लगभग 16 दिन बीत जाने के बावजूद न तो अभियुक्त के कथित बयान के अनुसार कोई गहना बरामद किया गया और न ही तालाब से फेंका गया बटुआ ही मिला।
परिजनों के बयान भी पुलिस दावे से मेल नहीं खाते
मृतका के पुत्र राजू मोदनवाल और राजकुमार मोदनवाल के बयानों में स्पष्ट किया गया कि मृतका के शरीर पर नाक की कील के अलावा कोई अन्य आभूषण नहीं था। यह तथ्य अभियुक्त के कथित स्वीकारोक्ति बयान से पूरी तरह विरोधाभासी पाया गया।
केस डायरी में भी नहीं दिखी गंभीर विवेचना
न्यायालय ने यह भी पाया कि विवेचक द्वारा प्रस्तुत केस डायरी संख्या 8 और 9 में कोई ठोस साक्ष्य संकलन नहीं दर्शाया गया है। सी.डी. संख्या 8 में केवल पोस्टमार्टम रिपोर्ट का पुनरावलोकन है, जबकि सी.डी. संख्या 9 में विवेचना की प्रगति का कोई उल्लेख नहीं किया गया।
न्यायालय ने रिमाण्ड बढ़ाने से किया इनकार
अदालत ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि विवेचक द्वारा मामले में न तो रुचि ली गई और न ही अभियुक्त के विरुद्ध कोई ऐसा साक्ष्य प्रस्तुत किया गया जिससे न्यायिक अभिरक्षा अवधि बढ़ाई जा सके। इन परिस्थितियों में रिमाण्ड आवेदन को स्वीकृत करने का कोई आधार नहीं बनता।
पुलिस प्रशासन पर फिर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर टाण्डा कोतवाली पुलिस की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निष्पक्ष विवेचना होती तो सच्चाई सामने आ चुकी होती। अब देखना यह है कि उच्च अधिकारी इस प्रकरण में क्या कदम उठाते हैं।
- हरीलाल प्रजापति
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