अम्बेडकर नगर: बहलोलपुर ग्राम पंचायत में भ्रष्टाचार की शिकायत पर जांच ठंडे बस्ते में, शिकायतकर्ता का विश्वास टूटा
अंबेडकर नगर के रामनगर विकासखंड अंतर्गत बहलोलपुर ग्राम पंचायत में कथित भ्रष्टाचार की शिकायत तीन माह बाद भी लंबित है। शिकायतकर्ता मिश्री लाल यादव ने ग्राम सचिव और प्रधान पर फर्जी बिल, सरकारी फंड के दुरुपयोग और लाखों के गबन के गंभीर आरोप लगाए थे, लेकिन जिला अधिकारी स्तर पर अब तक कोई जांच शुरू नहीं हुई। ग्रामीणों में प्रशासन की कार्यशैली पर गहरी नाराज़गी है और वे सवाल उठा रहे हैं कि क्या मामले को जानबूझकर दबाया जा रहा है। स्थानीय लोग इस घटना को सरकारी सिस्टम की लापरवाही और बढ़ते भ्रष्टाचार का उदाहरण बता रहे हैं।
अंबेडकर नगर, अचल वार्ता। जिले के रामनगर विकासखंड के बहलोलपुर ग्राम पंचायत में कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की शिकायत जिला अधिकारी को सौंपे हुए तीन माह बीत चुके हैं, लेकिन न तो कोई जांच शुरू हुई है और न ही कोई कार्रवाई। शिकायतकर्ता मिश्री लाल यादव ने 25 अगस्त 2025 को एफिडेविट के माध्यम से ग्राम पंचायत के सचिव और प्रधान पर फर्जीवाड़े के बिंदुवार आरोप लगाए थे, लेकिन मामला अब भी लंबित है।
ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर शिकायत 'जमीन खा गई' या 'आसमान खा गई', या फिर किसी अधिकारी के टेबल पर फाइल धूल फांक रही है।मिश्री लाल यादव, पुत्र संतराम यादव, ने जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें ग्राम पंचायत के विकास कार्यों में अनियमितताओं, फर्जी बिलों और सरकारी योजनाओं के फंडों के दुरुपयोग का जिक्र किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्राम सचिव और प्रधान ने मिलीभगत से फर्जी दस्तावेज तैयार कर कई लाखों रुपयों का गबन किया है।
शिकायतकर्ता ने बताया, " मैं फर्जीवाडे का जांच करवाने के लिए एफिडेविट के साथ शिकायत दिया था, लेकिन अब तक न तो कोई जांच टीम आई और न ही कोई सूचना मिली। क्या जिला अधिकारी को इसकी जानकारी नहीं दी गई? या फिर भ्रष्ट अधिकारी इतने शक्तिशाली हैं कि जांच को ही दबा दिए हैं?"ग्रामीण क्षेत्र में यह मामला तेजी से चर्चा का केंद्र बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी सिस्टम पर से भरोसा उठता जा रहा है।
एक ग्रामीण ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "ग्राम प्रधान और सचिव तो बचाव के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं, लेकिन शिकायतकर्ता को न्याय कब मिलेगा? कहीं पूरा तंत्र ही भ्रष्टाचार की जड़ों में फंसा तो नहीं है?" एक अन्य निवासी ने सवाल उठाया कि क्या अधीनस्थ अधिकारी 'लक्ष्मीनिया का पूजा' करके बैठे हैं, या फिर मामला जानबूझकर दबाया जा रहा है।
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